डॉ सुशील भाटी
शामली जिले के कैराना और कांधला
क्षेत्र में यमुना नदी के पूर्वी तट पर चौहान गुर्जरों की कलस्यान खाप के 84 गाँव
आबाद हैं| प्रसिद्ध इतिहासकार राम शरण शर्मा
अपनी पुस्तक भारतीय सामन्तवाद में कहते हैं कि अपने नव विजित क्षेत्र में, 12 अथवा
उसके गुणांक 24, 60, 84, 360 की संख्या में गाँवो
की जागीर अपनी सेना के विजेता सरदारों को प्रदान करने की परिपाटी, कन्नौज के
गुर्जर प्रतीहार सम्राट तथा उनके गुहिल, तोमर, चौहान आदि सामंतो की रही हैं| कल्स्यान गुर्जर इस खाप को बसाने का श्रेय
हरिराज चौहान उर्फ़ राणा हर्रा को प्रदान करते हैं| हरिराज चौहान दिल्ली-अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान उर्फ़ राय पिथोरा
के भाई थे| अतः चौहान गुर्जरों की यह कलस्यान
चौरासी खाप मूलतः एक जागीर हैं जिसे पृथ्वीराज राज चौहान ने अपने भाई हरिराज चौहान
को प्रदान किया था| हरिराज चौहान ने पंजीठ गाँव को
चौरासी का केंद्र बनाया| उसने इस क्षेत्र में तीतरवाडा गाँव के त्तीतर खान को
मारकर क्षेत्र के लोगो को उसके ज़ुल्मो से मुक्ति दिलाई थी| अपने पुत्र कल्सा को इस जागीर की देखभाल का कार्य सौप कर हरिराज
चौहान अजमेर चले गएँ| 1192 में पृथ्वीराज चौहान तराइन के
दूसरे युद्ध में मौहम्मद गोरी से पराजित हो गए और दिल्ली पर तुर्कों का कब्ज़ा हो
गया| किन्तु चौहानों ने हरिराज चौहान के
नेतृत्त्व में अजमेर से तुर्कों के विरुद्ध संघर्ष ज़ारी रखा| कालान्तर में चौहान
अजमेर में भी पराजित हुए| परिणाम स्वरुप चौहान राजपरिवार के सदस्यों ने रणथम्भोर
को अपना केंद्र बना लिया| मशहूर
इतिहासकार डिर्क एच ए कोल्फ के अनुसार यह हरिराज चौहान बगडावत गुर्जरों का भी दादा
था|
इधर हरिराज चौहान के पुत्र कल्सा ने पंजीठ
के अतिरिक्त कैराना को अपना केंद्र बनाया और चौरासी का संचालन किया| कल्सा के नाम पर ही यह चौरासी कलस्यान चौरासी
खाप कहलाई| मुग़ल बादशाह अकबर के समय भी कलस्यान खाप प्रभावशाली रूप से अस्तित्व
में थी| सर्वखाप पंचायत के सौरम गाँव में
स्थित कार्यालय के दस्तावेजों के अनुसार 1578 ई. में अकबर ने दिल्ली सूबे की पांच खाप जिनमे बालियान जाट खाप,
कलस्यान गूजर खाप, सलकलेन जाट खाप, दहिया
जाट खाप तथा गठवाला जाट खाप सम्मिलित थी, के लिए
एक फरमान ज़ारी कर उन्हें धार्मिक मामलो और आतंरिक प्रशासनिक मामलो में स्वतंत्रता
प्रदान की थी| आज भी कलस्यान खाप के चौहान गुर्जर
बालियान और सलकलेन जाटो से विशेष भाईचारा मानते हैं| अबुल फज़ल द्वारा लिखित आईन-ए-अकबरी पुस्तक के अनुसार दिल्ली सूबे की
सहारनपुर सरकार में कैराना महल के जमींदार गूजर जाति के थे| इसके अतिरिक्त कांधला जोकि दिल्ली सरकार के
अंतर्गत था, वहाँ के जमींदार भी गूजर जाति के थे| इस प्रकार हम देखते हैं कि अकबर के शासनकाल में
कल्शान चौरासी के क्षेत्र कैराना-कांधला में गूजर जमींदार थे| कैराना में आज भी कलस्यान चौपाल हैं, जहाँ खाप की आवश्यक बैठक होती हैं| कलस्यान खाप के वर्तमान चौधरी कैराना के चौधरी
रामपाल हैं, जोकि मूलतः पंजीठ गाँव से
हैं| हालाकि कुछ पीढियों पहले उनका परिवार कैराना में बस गया था| उनके चाचा चौधरी हुकुम सिंह (1938 -2018) कैराना
से सांसद और विधायक रहें हैं| सन 1964 तक चौधरी हुकुम सिंह के दादा चौधरी मान
सिंह कलस्यान खाप के चौधरी थे| उसके
बाद चौधरी मान सिंह के बड़े पुत्र चौधरी मुख्तार सिंह 1964 से 2003 ई. तक खाप के चौधरी रहें| उसके बाद
चौधरी मुख्तार सिंह के पुत्र चौधरी रामपाल सिंह 2003 से कलस्यान खाप के चौधरी हैं|
तुर्कों और मुगलों के काल में
कलस्यान खाप के कुछ परिवारों ने इस्लाम धर्म अपना लिया था| कलस्यान खाप के ग्राम
माल्हीपुर में जन्मे मशहूर इतिहासकार राणा अली हसन चौहान के अनुसार उनके पूर्वज
राणा वीरसाल ने 1300 ई. के आस-पास इस्लाम धर्म अपनाया था| राणा अलीहसन चौहान के अनुसार हरिराज चौहान (हर्रा) की सत्ताईस्वी
पीढ़ी में उनका जन्म हुआ| राणा वीरसाल के अतिरिक्त चौहान गुर्जरों की कल्शान खाप के बहुत
से अन्य परिवारों एवं गाँवों ने भी इस्लाम धर्म काबुल कर लिया था| कलस्यान चौरासी का मूल मुख्यालय पंजीठ के एक
परिवार ने भी इस्लाम धर्म अपना लिया और वो पास में ही जन्धेदी गाँव में बस गया| जबकि उनके हिंदू भाई ही काल्स्यान खाप की चौधर संभालते
रहे। जन्धेडी
के इसी मुस्लिम कलस्यान गुर्जर परिवार में कालांतर में चौधरी अख्तर हसन (कलस्यान)
का जन्म हुआ, उनका परिवार कैराना के मोहल्ला "आल दरम्यान" में आकर बस
गया| उन्होंने कैराना में एक चबूतरा स्थापित किया और वहाँ से अपनी सामाजिक और
राजनैतिक गतिविधिया का संचालन किया|वे
1984 में कैराना से सांसद निर्वाचित हुए| उनकी
विरासत को उनके पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन (कलस्यान) (1964-2008) ने संभाला जोकि
संसद और विधानसभा के चारो सदनों के सदस्य रहें, इस उपलब्धि के कारण उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज
हैं| वर्तमान में चौधरी अख्तर हसन के
पोते चौधरी नाहिद हसन (कलस्यान) कैराना से विधायक और पोती चौधरी इकरा हसन
(कलस्यान) कैराना से सांसद हैं|
इस प्रकार हम देखते कि कलस्यान खाप
के मूल मुख्यालय पंजीठ से सम्बंधित एक ही खानदान के एक हिन्दू और एक मुस्लिम कलस्यान परिवार खाप की
सामाजिक और राजनैतिक गतिविधियों को नियंत्रित कर रहें हैं|
कलस्यान खाप में बीनडा गाँव की भी एक
अलग पहचान हैं| आज़ादी के बाद 1950 ई. में सर्व खाप पंचायत को फिर से सक्रिय किया
गया| इस हेतु मुज़फ्फरनगर के सोरम गाँव में सर्वखाप पंचायत
का आयोजन किया गया| पंचायत में पश्चिमी यू. पी., हरियाणा और पंजाब की विभिन्न
जातियों की लगभग 18 खापो ने भागेदारी की| बीनडा गाँव के चौधरी जवान सिंह (कलस्यान)
गुर्जर को सर्वखाप पंचायत का प्रधान चुना गया| ठाकुर यशपाल सिंह निवासी ग्राम पनियाला को सर्वखाप का उप प्रधान तथा एवं
ग्राम सोरम के चौधरी कबूल सिंह (जाट) को सर्वखाप का मंत्री/वजीर चुना गया| सर्वखाप पंचायत ने बहुत से महत्वपूर्ण प्रस्ताव
पारित किए, जो प्रतिभागी सभी खापो और जातियों
के लिए बाध्यकारी थे| बीनडा गाँव से चौधरी नारायण सिंह सन
1979-80 में (कलस्यान) उत्तर प्रदेश के पहले उप मुख्यमंत्री रहें| इनके पुत्र श्री
संजय (कलस्यान) चौहान बिजनौर लोकसभा से सांसद रहें तथा वर्तमान में इनके पोते श्री
चन्दन चौहान बिजनौर से सांसद हैं|
कलस्यान खाप का जसाला गाँव भी
महत्वपूर्ण हैं| यहाँ के चौधरी अजब सिंह कांधला से
विधायक रहें| बाद में उनके भतीजे चौधरी वीरेंदर सिंह अनेक बार कांधला से विधायक
रहें| उनके दूसरे भतीजे चौ. यशवीर सिंह
1989 में खादी एवं ग्राम उद्योग के अध्यक्ष बने| चौधरी वीरेंदर सिंह के सुपुत्र
श्री मनीष चौधरी शामली जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष रहें हैं| डुंडुखेड़ा गाँव में कलस्यान इंटर कॉलेज हैं|
इस प्रकार स्पष्ट हैं कि कलस्यान खाप
की क्षेत्रीय समाज और राजनीती में महत्वपूर्ण भूमिका हैं| इसका प्रमुख कारण कलस्यान खाप की एकता हैं|
गुर्जरों की कलस्यान खाप में 84 गाँव,
जोकि मुख्यतः जनपद शामली के अंतर्गत आते हैं, की सूची निम्नवत हैं-
मुस्लिम कलस्यान गुर्जरों के गाँव की
सूची – 1. पंजीठ 2. जन्धेडी 3. मंडावर 4. गंदरऊ 5. दभेडी खुर्द 6. गढ़ी मियां 7. रामडा 9. खुरगान
10. बसेड़ा 11. अकबरपुर सुन्हेटी 12. गढ़ी दौलत 13. मंसूरा 14. मुकुंदपुर खेडी 15.
बरनावी 16. रोटन 17. ओदरी 18. ख्वाजपुरा/कबीरपुर 19. फतेहपुर (यमुना किनारे) 20. असरपुर/अशरफपुर 21. बधुपुरा 22. बराला 23. गोंगवान 24 केरटू 25. माल्हीपुर (मशहूर इतिहासकार राणा अली हसन का
पैतृक गाँव) 26. चौंतरा 27. मलकपुर 28. जडाना 29. दुगड्डा 30. अम्भेटा 31. गढ़ी
अब्दुल्ला, 32. साल्हा खेडी 33. तसंग 34.
बरनऊ
यमुना नदी द्वारा अपना रास्ता बदलने
के कारण मुस्लिम कलस्यान गुर्जरों के कुछ गाँव हरयाणा में चले गएँ, जो इस प्रकार
हैं- 1.पत्थरगढ़ (राय पिथोरा के नाम पर), 2. जलालपुर 3. गढ़ी बैसख 4. राणा माजरा 5.
बल्हेडा 6. मुण्डी गढ़ी, 7. नवादा
हिन्दू-मुस्लिम कलस्यान गुर्जरों के
मिश्रित गाँवो की सूची – 1. कैराना,
2. भूरा 3. पावटी कला 4. बलवा गुजरान 5. खन्द्ररावली 6. खेडा कुरतान 7. तीतरवाडा 8. अलीपुर 9. जहानपुरा
10. कांधला 11. ममौर
हिन्दू कलस्यान गुर्जरों के गाँव की
सूची – 1. कंडेला 2. शेखूपुरा 3. हिंगोखेड़ी
4. मीमला 7. ऊँचागाँव 8. गुर्जरपुर
9. बीनडा 10. पंजोखरा
12. बुच्चाखेडी 13. फतेहपुर 14. जगनपुर 15. आल्दी 16. गढ़ी रामकौर 17. डुंडुखेड़ा 18. श्याम गढ़ी 19. रसूलपुर 20. जसाला 21.
ब्रह्मखेडा 22. डूढार 23. बल्हेडा 24. इस्सोपुर
टील, 25. सहपत 26. बोड्ढा 27. गढ़ी राडा 28. चढाव 29. सलेमपुर 30 पठेड 31.
बीबीपुर 32. डोंकपुरा 33. जैनपुर 34. गंगेरु 35. ककौर
दिल्ली रोड के पूर्व में कलस्यान
चौरासी के सात गाँव पड़ते हैं, इन्हें सतगामा भी कहते हैं| ये सात गाँव इस प्रकार हैं- जसाला, रसूलपुर, मीमला, बलवा गुजरान,
पंजोखरा, और ब्रह्मखेडा| इस सतगामे की चौधर लम्बे समय तक माल्हीपुर गाँव में रही
हैं| आज़ादी से पहले माल्हीपुर के बाबा
न्यादरा सतगामे के प्रसिद्ध चौधरी थे| इस
सतगामे की पुरानी धर्मशाला खंद्रावली रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित हैं| यह
धर्मशाला इस सतगामे की चौधर का प्रतीक हैं, वर्तमान में बड़ी जीर्ण-शीर्ण अवस्था
में हैं| बाबा न्यादर अली उर्फ़ न्यादरा
गुर्जर जाति की जो भी बारात खंद्रावली रेलवे स्टेशन आती थी, उन सभी का उचित सत्कार
कर उन्हें अपनी बैलगाडियो से उनके गंतव्य तक पहुचाते थे| माल्हीपुर के श्री क़ुतुब मुखिया भी सतगामे के चौधरी रहें हैं| वर्तमान में बलवा गाँव के चौधरी अनिल सिंह
(कलस्यान) सतगामे के चौधरी हैं|
कलस्यान चौरासी में एक नौगामा भी
जिसमे आल्दी, फतेहपुर, गुर्जरपुर, सलेमपुर, मलकपुर आदि गाँव हैं| आल्दी के चौधरी पहल सिंह नौगामे के मौजूदा
मुखिया हैं|
इसी प्रकार कलस्यान चौरासी में एक
बारहा भी हैं जिसमे तीतरवाडा, सहपत, चढाव, गंगेरु, गढ़ी दौलत, डुंडुखेड़ा,ऊँचा गाँव,
बुच्चाखेडी आदि गाँव हैं|
वर्तमान में तीतारवाडा के चौधरी सुरेश सिंह बारहा के चौधरी हैं|
खुरगान के चौधरी फतेहजंग भी क्षेत्र
की मशहूर हस्ती रहें हैं, जोकि अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं| खुरगान मुस्लिम कलस्यान गुर्जरों का सबसे बड़ा
गाँव हैं| कांधला के चौधरी शफकत जंग 1971 में
कैराना से सांसद रहें, उनके यहाँ सभी हिन्दू-मुस्लिम कलस्यान गुर्जर आते-जाते थे, और एक ही हुक्का पीते थे|
गुर्जरों की कलस्यान खाप एकता की
मिसाल हैं| कलस्यान खाप हिन्दू और मुस्लिम
दोनों धर्मो के मानने वाले गुर्जर हैं किन्तु वे समाज में बहुत भाईचारे से रहते
हैं, वे सभी अपने को बाबा कल्सा की संतान मानते हैं| राजनीती में भी वो धर्म-संप्रदाय से ऊपर उठकर जाति के उमीदवार को वोट
करते हैं|
सन्दर्भ –
1. Dirk H A Kolff, Naukar, Rajput and Sepoy, Cambridge University Press, 1991, p 83
2 . राणा अली हसन चौहान, गुर्जरों का संछिप्त इतिहास (अनुवाद-
श्री ओमप्रकाश गुर्जर (गांधी), यमुनानगर, 2001
3. R S Sharma, Indian Feudalism, AD 300-1200, Macmilan publishers pvt. ltd, Delhi, 1965
4. Sushil Bhati, Khaps in Upper Doab of Ganga and Yamuna,
Janitihas Blog, 2017 https://janitihas.blogspot.com/2017/01/khaps-in-upper-doab-of-ganga-and-yamuna.html
5. John F Richards, The Mughal Empire, Part 1, Vol. 5,
Cambridge University Press, 1995
6 . M C Pradhan, The political system of the Jats of
Northern India. 1966
7. Abul Fazl Allami, Ain I Akbari, Vol. II (Translation- H
S Jarrett), Calcutta, 1981
8. D.R.
Chaudhary, Khap Panchayat and Modern
Age, National Book Trust, 2014
9. “For instance, in its
first sarv khap panchayat after independence in Sorem in the district of
Muzaffarnagar of western UP held in 1950, Chaudhary Jawan Singh Gurjjar of the
village Beenra Niwas was its pradhan, Thakur Yashpal Singh of village Puniala
was UP Pradhan, while Chaudhary Kabul Singh of village Sorem was its mantri,” https://iajesm.in/admin/papers/67cec74342bb6.pdf
10. अनिरुद्ध चौहान (कलस्यान), ग्राम
ब्रह्मखेडा, जिला शामली, टेलीफोनिक साक्षात्कार, दिनांक 26.12.25
11. चौधरी मैसर अली (कलस्यान) चौहान,
ग्राम माल्हीपुर, जिला शामली,
टेलीफोनिक साक्षात्कार, दिनांक 27.12.25
12. श्री सतीश कलस्यान, ग्राम गढ़ी
रामकौर, जिला शामली, टेलीफोनिक साक्षात्कार, दिनांक
28.12.25
13. श्री विनय कलस्यान, ग्राम जसाला,
जिला शामली, टेलीफोनिक साक्षात्कार, दिनांक
29.12.25
14. सुशील भाटी, राणा अली हसन चौहान की वंशावली, Janitihas Blog, 2023
https://janitihas.blogspot.com/2023/06/
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| कलस्यान चौरासी खाप के चौधरी रामपाल सिंह डॉ सुशील भाटी के साथ |

