डा . सुशील भाटी
18 मई 1857 को बडौत में क्रान्तिकारियों से घमासान लडाई के बाद अंग्रेजो ने सरधना की तरफ रूख किया। यहाँ अकलपुरा गांव के जमीदार नरपत सिंह की अगुआई में आस-पास के लोगो ने क्रान्ति का झण्डा बुलन्द कर रखा था। 10 मई को नरपत सिंह के नेतृत्व में अकलपुरा के राजपूतों और आसपास के रांघडो ने सरधना तहसील पर हमला कर दिया। लेकिन नरपत सिंह के एक रिश्तेदार जमीदार ने तहसील पर होने वाले हमले की जानकारी तहसीलदार को पहले ही दे दी थी। तहसीलदार ने खजाने के रक्षकों को सावधान कर दिया। तहसील के हाते में हुई इस लडाई में 15 क्रान्तिकारी शहीद हो गए। परन्तु क्रान्तिकारियों ने सरधने के बाजार के अंग्रेज परस्त व्यापारियों को लूट लिया और उन पर दैनिक जुर्माना लगा दिया। क्रान्तिकारियों हमले से भयभीत सरधना चर्च की नन और अन्य यूरोपियन मि0 मूर के नेतृत्व में मेरठ भाग आये।
खाकी रिसाला, जब 21 जुलाई 1857 को सरधना पहुँचा तो उन्होंने देखा कि बेगम समरू का महल और विशाल चर्च अक्षुण खडे है। खाकी रिसाले ने बेगम समरू के महल में डेरा डाल दिया। अंग्रेज कलैक्टर डनलप ने आस-पास के गाँवो में हरकारे भेजकर लगान जमा करने के लिए कहा। जब अंग्रेजो का एजेण्ट अकलपुरा पहुँचा तो नरपत सिंह ने विद्रोही सुर मे उसे धमकाते हुए कहा कि जिला अधिकारी या तहसीलदार कौन होते है उनसे लगान मांगने वाले? यदि फिर कभी यहाँ आया तो जान से मार देगें! नरपत सिंह का जवाब जानकर अंग्रेज आग बबूला हो गए और उन्हौनें तुरन्त अकलपुरा पर चढ़ाई कर दी।
22 जुलाई को खाकी रिसाला अकलपुरा पहुँच गया और गांव को चारो तरफ से घेर लिया।क्रांतिकारी भी तैयार थे। रात में ही औरतों और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। अंग्रेजो की गोली का जवाब गोली से दिया गया। क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजो को गांव में घुसने नहीं दिया। इस पर अंग्रेजो ने तोपो से गोलाबारी की और गांव में घुसने में कामयाब हो गए। क्रान्तिकारी नरपत सिंह के घर के आस-पास मोर्चा जमाए हुये थे। परन्तु आधुनिक हथियारों के सामने वे टिक न सकें। गांव मे जो भी आदमी मिला अंग्रेजो ने उसे गोली से उडा दिया। सैकडो क्रान्तिकारी शहीद हो गए।
उनके शव जहाँ-तहाँ पडे थे उनमे से एक सुन्दर और सुडोल शव नरपत सिंह का भी था।
संदर्भ
1. डनलप, सर्विस एण्ड एडवैन्चर ऑफ खाकी रिसाला इन इण्डिया इन 1857-58।
2. नैरेटिव ऑफ इवैनटस अटैन्डिग दि आउटब्रेक ऑफ डिस्टरबैन्सिस एण्ड रैस्टोरशन ऑफ ऑथोरिटी इन दि डिस्ट्रिक्ट ऑफ मेरठ इन 1857-58।
3. एरिक स्ट्रोक, पीजेन्ट आम्र्ड।
4. एस0 ए0 ए0 रिजवी, फीड स्ट्रगल इन उत्तर प्रदेश खण्ड-5
5. ई0 बी0 जोशी, मेरठ डिस्ट्रिक्ट गजेटेयर।
( Dr. Sushil Bhati )
18 मई 1857 को बडौत में क्रान्तिकारियों से घमासान लडाई के बाद अंग्रेजो ने सरधना की तरफ रूख किया। यहाँ अकलपुरा गांव के जमीदार नरपत सिंह की अगुआई में आस-पास के लोगो ने क्रान्ति का झण्डा बुलन्द कर रखा था। 10 मई को नरपत सिंह के नेतृत्व में अकलपुरा के राजपूतों और आसपास के रांघडो ने सरधना तहसील पर हमला कर दिया। लेकिन नरपत सिंह के एक रिश्तेदार जमीदार ने तहसील पर होने वाले हमले की जानकारी तहसीलदार को पहले ही दे दी थी। तहसीलदार ने खजाने के रक्षकों को सावधान कर दिया। तहसील के हाते में हुई इस लडाई में 15 क्रान्तिकारी शहीद हो गए। परन्तु क्रान्तिकारियों ने सरधने के बाजार के अंग्रेज परस्त व्यापारियों को लूट लिया और उन पर दैनिक जुर्माना लगा दिया। क्रान्तिकारियों हमले से भयभीत सरधना चर्च की नन और अन्य यूरोपियन मि0 मूर के नेतृत्व में मेरठ भाग आये।
खाकी रिसाला, जब 21 जुलाई 1857 को सरधना पहुँचा तो उन्होंने देखा कि बेगम समरू का महल और विशाल चर्च अक्षुण खडे है। खाकी रिसाले ने बेगम समरू के महल में डेरा डाल दिया। अंग्रेज कलैक्टर डनलप ने आस-पास के गाँवो में हरकारे भेजकर लगान जमा करने के लिए कहा। जब अंग्रेजो का एजेण्ट अकलपुरा पहुँचा तो नरपत सिंह ने विद्रोही सुर मे उसे धमकाते हुए कहा कि जिला अधिकारी या तहसीलदार कौन होते है उनसे लगान मांगने वाले? यदि फिर कभी यहाँ आया तो जान से मार देगें! नरपत सिंह का जवाब जानकर अंग्रेज आग बबूला हो गए और उन्हौनें तुरन्त अकलपुरा पर चढ़ाई कर दी।
22 जुलाई को खाकी रिसाला अकलपुरा पहुँच गया और गांव को चारो तरफ से घेर लिया।क्रांतिकारी भी तैयार थे। रात में ही औरतों और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। अंग्रेजो की गोली का जवाब गोली से दिया गया। क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजो को गांव में घुसने नहीं दिया। इस पर अंग्रेजो ने तोपो से गोलाबारी की और गांव में घुसने में कामयाब हो गए। क्रान्तिकारी नरपत सिंह के घर के आस-पास मोर्चा जमाए हुये थे। परन्तु आधुनिक हथियारों के सामने वे टिक न सकें। गांव मे जो भी आदमी मिला अंग्रेजो ने उसे गोली से उडा दिया। सैकडो क्रान्तिकारी शहीद हो गए।
उनके शव जहाँ-तहाँ पडे थे उनमे से एक सुन्दर और सुडोल शव नरपत सिंह का भी था।
संदर्भ
1. डनलप, सर्विस एण्ड एडवैन्चर ऑफ खाकी रिसाला इन इण्डिया इन 1857-58।
2. नैरेटिव ऑफ इवैनटस अटैन्डिग दि आउटब्रेक ऑफ डिस्टरबैन्सिस एण्ड रैस्टोरशन ऑफ ऑथोरिटी इन दि डिस्ट्रिक्ट ऑफ मेरठ इन 1857-58।
3. एरिक स्ट्रोक, पीजेन्ट आम्र्ड।
4. एस0 ए0 ए0 रिजवी, फीड स्ट्रगल इन उत्तर प्रदेश खण्ड-5
5. ई0 बी0 जोशी, मेरठ डिस्ट्रिक्ट गजेटेयर।
( Dr. Sushil Bhati )